ARYAN SPEAKS: यही है जो कभी अपना था…बाकी तो हम सब भूल गए


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Ustaad Bismillah Khan, Bharat Ratna

पता नहीं ये बरखा की मेहरबानी है या क्या, आज सुबह उठते ही कुछ ठेठ सुनने का दिल कर गया. अब बरसात के मौसम में एक कजरी न सुनी तो क्या सुना। पहिले सोचा की गिरजा देवी का कुछ सुनते है, पर फिर तबियत पलट गयी.… देवी जी कुछ ज्यादा ही रागदारी लग देती हैं, तलब न हो तो आदमी बीच में ऊब जाए। फिर अगला नंबर आया डा. सोम घोष का और देखिये की कजरी भी मिजाज की मिल ही गयी , ” मिर्जापुर कइले गुलजार हो, कचौड़ी गली छोड़ गइले बलमू “, और मजा सवाया तब हो गया जब देखा की उस्ताद साहब खुद शहनाई पर हैं। बस फिर क्या था, अगले दस मिनट में हम तो दोनों जहाँ की सैर बेटिकट ही कर आये। धुनें कैसे चलती हैं ये भी बड़े मजे की चीज़ है , रागदारी वही रहती है, जगह बदलती है, बोली बदलती है, लयकारी बदलती है और बनारस की ये कजरी हमारी शारदा सिन्हा गाती हैं और ये छठ के एक एक गीत में बदल जाती है.… पर मजा नहीं बदलता।

ये बात उस्ताद साहब भी मानते थे। उनका कहना था की अल्लाह के अलावे सिर्फ एक ही चीज़ है जो सिर्फ एक ही है…. सुर। अब हम तो बेवक़ूफ़ ठहरे , मगर फिर भी कभी कभी , जब कोई शहनाई ऊपर के सुरों से खिलवाड़ करती है, या कोई हठधर्मी गायक पंचम को तार सप्तक पे पहुँचाने की जिद कर बैठता है तो लगता है की नहीं, बात में कुछ दम है।  दम क्यों न हो… जरा ये तो देखिये बोल कौन रहा है. अच्छा अगर मिजाज में हों तो कभी उस्ताद साहब का कोई इंटरव्यू देखिये। जैसे और बड़े लोग साक्षात्कार देते हैं, बड़ी बड़ी बातें करते हैं , अपने सारा संगीत ज्ञान हम निरीह प्राणियों में उढेल देने की चेष्टा करते हैं, वैसा उस्ताद कुछ नहीं करते।

आप तो उनका इंटरव्यू देखिये मस्त हो जाने के लिये…. ये देखने के लिए की कैसे कोई भारत रत्न आदमी खटिया पे बैठ कर आपको पकौड़ी छानने की तकनीक बताता है . प्रेमचंद ने लिखा था, ‘ बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरागमन होता है ‘…एक दम सही लिखा था। एक इंटरव्यू में उस्ताद साहब बरसात को याद करते कहीं खो जाते हैं –

” कभी कभी जमघट ऐसा होता था.… बनारस मे… झूला पड़ा है… सावन का महिना है। तो सब गायका बुलाई गयी हैं.… और एक तरफ जो है सो , पूरी , तरकारी, आम है.… सब बन रहा है, एक तरफ झूला पड़ा है, तीन गायका बैठी हैं, और दो पेंग लगा रही हैं और गाना क्या हो रहा है.…सिया संग झूले बगिया में राम ललना (गा के बताते हैं )… इतना गाया , और पेंग चढ़ी, और मामू बजा रहे हैं हमारे, और हम भी बैठे हैं साथ में, और हम भी बोल कह रहे हैं साथ में ”

इसी इंटरव्यू में आगे जा कर टीमल साहू का भी जिक्र होता है जिनके यहाँ से उस्ताद घी लाया करते थे नानी से पराठा और पियाज का कतरा बनवाने के लिए …” खा रहे हैं और झिमिर झिमीर पानी बरस रहा है… वो मजा आ रहा है…. और वो जायका है उसमे के अब वो नहीं है.… पैसा खर्च करने के बाद भी वो जायका नहीं है. ” आगे बेग़म अख्तर का भी जिक्र होता है… वो गाती हैं, “पिया ना जाए, प्राण जाए “, तो खान साहब पिन मारते हैं , ” पिया जाए, प्राण न जाए ” . वो कहती हैं की अमाँ खान साहब, ये क्या कह दिया …तो खान साहब कहते हैं की वही तो कह रहे है जो तुम कह रही हो.

खान साहब वो शख्स थे जिन्होंने सैंतालिस में भी शहनाई बजाई थी , बालाजी मंदिर का पट भी उनकी शहनाई से ही खुलता था और मुहर्रम का मातम भी उनकी शहनाइ के बिना पूरा नहीं होता था। दुनिया जहान घूम आये, मगर थे पूरे बनारसी। उनका कहना था की जब वो हिन्दुस्तान के बाहर जाते हैं  हिंदुस्तान ही दिखता है, और जब हिन्दुस्तान के किसी शहर में जाते हैं तो बनारस ही दीखता है।  बहुत से लोग बाहर चले गए अपने संगीत को दुनिया में फैलाने, और फैलाया भी.… मगर खान साहब से हिन्दुस्तान नहीं छूटा।  ठुमरी, कजरी, दादरा…. ये सब अपनी धरती के के गाने खान साहब को बड़े प्यारे थे, कैसे छोड़ते ?

मगर खान साहब… हम ठहरे भुलक्कड़।  सब भूल जाते हैं।  ये कजरी वजरी क्या होती है हमें नहीं मालूम।  अभी तो आप यदा कदा दिख जाते हो टीवी पर तो याद हो, एक दिन आपको भी भूल जाएँगे। हमें ये भी नहीं मालूम की हमारे गाँव घर में भी कभी सावन में झूला पड़ा करता था और बड़ी बूढ़ियाँ यही चैती , यही कजरी गाती थीं, या होली की रात संगत बैठती थी और चैता छाना जाता था, और वही पकौड़ी छनती थी जो आपके यहाँ छनती थी .  हमारे पास इतना समय कहाँ है।  एक दिन हमें कुछ याद नहीं रहेगा, सब बहा देंगे . और एक दिन ऐसा भी आएगा की हमारी नस्लें सवाल करेंगी कुछ ऐसा भी है जो हमारा अपना है.…  या सब कुछ पच्छिम से ही उठा लाए हैं ? पता नहीं जवाब देने भर का मुंह भी बचा होगा या नहीं।  उम्मीद है की यू ट्यूब पर तब भी आप लोगों के कुछ विडियो होंगे।  सो वही दिखा देंगे की देखो , यही है जो कभी अपना था , बाकी तो हम सब भूल गए.….माडर्न जो हो गये।

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Links to interviews

1. Ustaad Sahab on RKB show: http://www.youtube.com/watch?v=15CdeNLb7KQ

2. http://www.youtube.com/watch?v=k8kyjwOhsw8

Dr. Soma Ghosh :

1. Mirkapur Kaile.. : http://www.youtube.com/watch?v=_OHOgnnj7JM

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